॥ श्रीहरिः ॥
आरती जय शिव ओंकारा

आरती जय शिव ओंकारा

सनातन परम्परा

🪔 आरती

भगवान आशुतोष शिव-शंकर की यह पारम्परिक आरती शिव मन्दिरों एवं प्रदोष काल में नित्य गाई जाती है। इसमें ब्रह्मा, विष्णु और सदाशिव के एकात्म भाव, पञ्चानन रूप तथा गंगा-मस्तक त्रिशूलधारी महादेव की वन्दना है।

आरती जय शिव ओंकारा

भगवान आशुतोष शिव-शंकर की यह पारम्परिक आरती शिव मन्दिरों एवं प्रदोष काल में नित्य गाई जाती है। इसमें ब्रह्मा, विष्णु और सदाशिव के एकात्म भाव, पञ्चानन रूप तथा गंगा-मस्तक त्रिशूलधारी महादेव की वन्दना है।

॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥
॥ आरती श्री शिव ओंकारा ॥
॥ १ ॥
जय शिव ओंकारा, हर ॐ शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धाङ्गी धारा॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
अर्थ : हे प्रणव ओंकार स्वरूप भगवान शिव! आपकी जय हो, हे हर हर महादेव! आपकी जय हो। ब्रह्मा, विष्णु और सदाशिव आपके ही रूप हैं और वामाङ्ग में भगवती शक्ति अर्द्धाङ्गिनी रूप से विराजित हैं।
॥ २ ॥
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।
हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
अर्थ : सदाशिव रूप में आप पञ्चमुख, ब्रह्मा रूप में चतुरानन और विष्णु रूप में एकानन शोभित हैं। ब्रह्मा जी का हंस-वाहन, श्रीहरि का गरुड़-वाहन और महादेव का नन्दी वृषभ-वाहन आपकी ही लीला का विस्तार है।
॥ ३ ॥
दो भुज चारु चतुर्भुज दशभुज अति सोहे।
तीनों रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
अर्थ : ब्रह्मा के रूप में दो भुजाएँ, भगवान विष्णु के रूप में चार भुजाएँ और देवाधिदेव शिव के रूप में दस भुजाएँ अत्यन्त सुशोभित हैं। आपके इन तीनों दिव्य रूपों का दर्शन कर तीनों लोकों के प्राणी मुग्ध हो जाते हैं।
॥ ४ ॥
अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी।
त्रिपुरारी कंसारी करमाला धारी॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
अर्थ : ब्रह्मा जी अक्षमाला (रुद्राक्षमाला), श्रीविष्णु वैजयन्ती वनमाला और भगवान शंकर नरमुण्डों की माला धारण करते हैं। आप ही त्रिपुर दैत्य का संहार करने वाले त्रिपुरारी हैं और आप ही कंस का वध करने वाले कंसारी श्रीकृष्ण हैं।
॥ ५ ॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
अर्थ : ब्रह्मा जी श्वेत वस्त्र, भगवान विष्णु पीताम्बर और भगवान शिव व्याघ्रचर्म धारण करते हैं। सनकादि मुनि, गरुड़ादि देवगण तथा शिव-गण एवं भूत-प्रेत नित्य आपकी सेवा में संग रहते हैं।
॥ ६ ॥
कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूल धरता।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहर्ता॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
अर्थ : आपके हाथों में कमण्डलु (सृष्टि), सुदर्शन चक्र (पालन) और त्रिशूल (संहार) सुशोभित हैं। आप ही सृष्टि के रचयिता (जगकर्ता), पालनकर्ता (जगभर्ता) और प्रलयंकारी संहारकर्ता (जगसंहर्ता) हैं।
॥ ७ ॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
अर्थ : अज्ञानी मनुष्य ब्रह्मा, विष्णु और शिव को अलग-अलग सत्ता मानते हैं; किन्तु तत्त्वदर्शी ज्ञानी जानते हैं कि प्रणव ओंकार (ॐ — अ, उ, म) के भीतर ये तीनों देव वस्तुतः एक ही परब्रह्म हैं।
॥ ८ ॥
त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
अर्थ : सत्त्व, रज और तम — तीनों गुणों से परे इन त्रिगुणमय भगवान शिव की यह पावन आरती जो कोई श्रद्धापूर्वक गाता है, वह समस्त मनोवांछित फलों को प्राप्त कर अन्त में शिवपद को प्राप्त होता है।
॥ ९ ॥
जय शिव ओंकारा, हर ॐ शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धाङ्गी धारा॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
॥ इति श्री शिव आरती सम्पूर्णा ॥