आरती श्री कामदनाथ जी की
परम्परागत
चित्रकूट धाम में कामदगिरि पर्वत की पंचकोशी परिक्रमा के चारों द्वारों (प्रथम द्वार, द्वितीय द्वार, तृतीय द्वार, चतुर्थ द्वार) पर नित्य गाई जाने वाली यह परम पावन आरती भगवान कामतानाथ जी के अनुपम स्वरूप, भोग-प्रसाद, चार फल (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) और तीनों तापों के शमन का गुणगान करती है।
॥ आरती श्री कामदनाथ जी की ॥
(चित्रकूट धाम — कामदगिरि परिक्रमा)
॥ जय कामतानाथ जी की जय ॥
॥ जय कामदगिरि सरकार की जय ॥
॥ जय चित्रकूट धाम की जय ॥