पतित-पावनी माँ गंगा जी के पावन स्तोत्र एवं महिमा।
हिमालय की गोद से प्रवाहित होने वाली माँ गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की अमृत-धारा, पाप-नाशिनी और मोक्षदायिनी शक्ति हैं।
गंगा स्तोत्रम्
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